भूगोल
साँसी लोक भारत अर पाकिस्तान्ना म पाये जात्ते हैं। ज्यादा तर साँसी लोक भारता के उत्तर पश्चिमी इलाक्कैं म रैहते हैं, ज्यादा तर पंजाब, राजस्थान, हरयाणा अर दिल्ली। अर इसकै इलावा मध्य परदेस, हिमाचल, छत्तिसगढ़, अर महारास्ट्रा म फैल्लोड़े हैं। सिख लोक्कैं क मुताबित साँसी लोक लुधियाणें ज्यादा फैलोड़े हैं, पर इसकै अलावा होर भी पंजाब्बा के कई जिलैं म रैहते हैं, इसके अलावा जयपुर, जयसलमेर, बिकानेर, अर जोधपुर राजस्थान्ना के जिलै म पाये जात्ते हैं। इसके अलावा कई गाँवैं म भी साँसी लोक्कैं कु पाया जात्ता है। इसकै अलावा जो साँसी लोक पंजाब्बा म रैहते हैं, उनमें ज्यादा तर लोक कापड़े बेचणैं का काम करते हैं, अर बाक्की कुछ लोक काम काज़ करनै वास्तै दुसरे राज्य म जात्ते हैं, अर जो राजस्थान्ना के लोक हैं, वो भी ये ही सारे काम करते हैं, पर इसके अलावा खेत्ती-बाड़ी भी करते हैं, इसके अलावा साँसी लोक आपकी भाषा ही ज्यादा तर बोलणैं म सहमत होत्ते हैं।

लोग

सांसी बन्दे दौ भाग्गैं म बटोड़े हैं, “माल्हा” अर “बिढ्ढू”। ये नाम उनके नाम्मी बुज़ूर्गैं के नावैं पर धरोड़े हैं, जो राज साँसमला के भाई अर बेट्टे हैं, जिनकु वो आपके गुरूआ के रुप्पा म माण देत्ते हैं। बिढूआ के बारां बेट्टे थिये, अर माल्हे के ग्यारां। बाद्दाम ये दहूँऐं तेईस कुलैं अन्दर बंटी गये। (सन 1993: 1164) 1991 किया जनगणा क मुताबित साँसी समाज्जा कि कुल गिणती 85,651 है। इस बात्ता कु गुसाइय्यैं आपके केस्सा किया जाँच-पढ़ताळा म बताया है।
साँसी एक घूमतू जात्ती है, जिस्का कोइ एक ठीकाणा कोइन। अर नाही ही पक्के तौरा पर किसी जाघ्घा पर रैहणैं कि जाघ्घा या जुड़ाव कोइन। पैहलै इनकु “दोश्शी या अपराध्धी” जातिया के रुप्पा म जाणया जात्ता थिया। जिद ब्रिटिश अंग्रेज्जैं का राज थिया, उस वक्त इस जातिया कु “दोश्शी या अपराध्धी” जातिया किया सूचिया म शामिल करया गया थिया। सन 1947 म जिद अंग्रेज्जैं भारत छौड्या थिया, तो उस वक्त साँसी समाज्जा के लोक्कैं आपकिया अज़ादिया वास्तै घणी मैहनत करी थी।
उनूर अंग्रेज्जैं के जरीये “दोश्शी या अपराध्धी” जातिया के नावां कु आपके उपरा थ हटाणैं कि घणी कोशिश करी। घणी मैहनत करनै के बाद्दाम आख्खरीया म सन 1952 म उनकु इस अपराध्धी नांवा किया सूचिया थ अज़ाद करी दिया गया। तौभी उनकै आस्सै पास्सैं के लोक आज भी उनकु अपराध्धी जातिया के रुप्पा म मानते हैं, बाहरी लोक उनथै बात करनै कि हिम्मत नाही करैं, वो साँसी बन्दैं कु लड़ाई करनै आळे मानते हैं, अर याह भी मनते हैं कि उनकी लड़णैं की आदत उनकै सात्थी किसी भी मेल-जोल राखणैं म सारैं थ बड़ी रोक है।
उनकै माहले घणे साँसी खेत्ती-बाड़ी करया करते हैं, अर कई बूट पालस, अर कई पशू पाळणैं अर लोहा चुगणैं का काम, अर फेरीयैं का काम भी करते हैं। साँसी हिन्दू अर सिख धर्मा कु मानते हैं, अर घणे साँसी हिन्दू शिव भगवान्ना कु पूजते हैं, अर उनकै माहले कई राधा-स्वामी भी हैं, जिनका राजस्थान गंगानगर शहरा म सच्चा सौदा म एक मन्दर है।
राजस्थान्ना के घनसल जाघ्घा म, उनके पूर्वज़ैं किया याद-गारीया म एक मन्दर बणाओड़ा है (सन 1993: 1149) समाज्जा कु बणाई राखणैं वास्तै अर समाज्जा के लड़ाई या ओर मुद्दे कु सुधारनै वास्तै उनकी एक पारंपरिक पंचैत होत्ती है। उनकै वास्तै नियम-काहदे हैं, अर समाज आपके नियम-कायदे कु बणाई राखते हैं। (www.भाषा inindia.com) पैहली भाशा कि गिणती 1% थ कम है, अर दूसरी भाशा, सिंधी अर पंजाबीया कि गिणती 5% थ कम है। (गॉर्डन 2005: 386)
भाषा
सांसी (एस. एस. आई.) इस्कु इंडो-यूरोपीय, इंडो-ईरानी, इंडो-आर्यन, मध्य क्षेत्र, पश्चिमी हिंदी, हिंदुस्तानी, सांसी (गॉर्डन 2005: 386) के रूप्पा म बांट्या गया है। सांसीयैं कु भिलकी अर सांसिबोली इस नावां थ भी जाणया जात्ता है (गॉर्डन 2005: 386)। बोलचाल्ला के मामले म राजस्थान्नी, सिंधी, अर पंजाब्बी भाष्षैं थ इनका गहरा रिश्ता है। इनकी भाषा मिलोड़ी होत्ती है, जिस राज्य म रैहते हैं, औठ्ठी कि बौल्ली भी बोलते हैं, जिदाकी राजस्थान्नी, पंजाब्बी अर हिन्दी। अर ज्यादातर सांसी देवनागरीक लिपी ही इस्तमाल करते हैं।(www.LANGUAGEININDIA.com) एथनोलॉग कैहता है, कि इनकी बोल्ली पंजाब्बी अर पश्चिम दिशा किया हिन्दी भाषा के बिच्चा म है। अर किधी-किधी सांसी खुद कु मारवाड़ीयैं के रुप्पा म भी पिछाणते हैं। शब्द जो इनके मिल्ते हैं, वो उर्दू भाषा थ 71% है, सोची भाषा जो बंटोड़ी है, उनथै 83% मिलते हैं। (गॉर्डन 2005: 386) सर्वे करनै आळैं कु किनी एक्की बताया कि पंजाब्बा म सांसी उनकी भाषा नाही बोल्या करैं।
